गरीब बाप बना जोकर | Garib Baap Bana Joker | Hindi Kahani | हिंदी कहानी

बीबी नगर के एक गाँव में प्रमेश बोलकर एक आदमी रहता था | उनकी बीबी का नाम लीला वती है और उनका एक बेटा भी है जिसका नाम बाबु है | प्रमेश और लीला वती एक डोसे का ठेला लगाकर बेचते थे | बाबु भी कभी कबार उनकी काम में मदद करता था | लीलावती हर दिन बाबू को खाना खिलाती थी | और बाबू तो उनके माँ के पास सो कर उनके कहानी बिना सुने नही सोता था | Garib Baap Bana Joker Hindi Kahani 

Garib Baap Bana Joker Hindi Kahani
Garib Baap Bana Joker Hindi Kahani

एक दिन प्रमेश “अरे ओ बाबु स्कूल का टाइम हो रहा है अरे लीलावती तुम उसको टिफ़िन खिलाती ही रहती है क्या वक्त हो जायेगा न क्यों रे तुम अपने आप नही खा सकते हो क्या बड़े होने के बाद भी माँ के हाथ से ही खायेगा क्या हा हा हा” कह कर हसने लगा | एक दिन अचानक लीलावती का मौत हो गयी उनको याद करते हुए बाप और बेटे दोनों बहुत दुखी हो रहे थे | Garib Baap Bana Joker Hindi Kahani 

एक रात प्रमेश उठकर देखा तो बाबु उधर नहीं दिखाई दिया बाद में माँ का फोटो देखकर रुते हुए दिखाई दिया वो देखकर प्रमेश बहुत दुखी हो गया ” अरे बाबू क्या हुआ नींद नहीं आ रहा है क्या आ जाओ आ कर सो जाओ ” बाबु- “बाबा माँ कहाँ चली गयी मैं जब भी पूछता हु आप कहते हो बाद में आएगी बाद म आएगी सच बताओ बाबा माँ कहाँ गई है | (Garib Baap Bana Joker Hindi Kahani)

प्रमेश – ” बेटा तुम्हारी माँ काम से बहार गयी है | बहुत जल्दी वापस आ जाएगी रो मत आओ खाना खा लो ”

बाबु – ” नहीं सिर्फ माँ से ही मैं कहानी सुनूंगा वो मुझे बिना बताये बहार  कैसे जा सकती है रुको उसे आने दो मैं उससे बिलकुल बात नहीं करूँगा |

प्रमेश बाबु को खाना खिलाने के लिए कोसिस किया बाबु-” मुझे खाना वाना कुछ नहीं चाहिए मैं सिर्फ माँ के हाथ से खाऊंगा वरना मैं बिलकुल नहीं खाऊंगा ” प्रमेश- ” अरे मेरी बात नहीं समझ में आता है क्या दो दिन से तुमने कुछ भी नहीं खाया मुह खोलो नहीं तो मार खाओगे ” बाबु- ” मुझे कुछ नहीं चाहिए मुझे माँ ही खिलाएगी ” यह कहकर रोते हुए चला गया | (Garib Baap Bana Joker Hindi Kahani)

स्कूल में भी बाबु माँ के याद में ही रहता था टीचर बुलाया तो गबरा कर इस दुनिया में वापस आता था | सारे बच्चे खेलते थे लेकिन बाबु बैठकर आसमान में ही देखता रहता था | डोसा के ठेके के पास भी कहीं और देखकर माँ के ही बारे में सोचता रहता था |

एक दिन प्रमेश ” अरे ओ कहाँ खो गए हो ग्राहक पानी पूछ रहे है सुनाई नहीं देता है क्या जाओ जा कर पानी दो अगले बार इस ख्यालो में खो गया तो मार खाओगे ” बाबु- ” आज कल तुम मुझे बहुत डाट रहे हो तुम मुझे प्यार ही नहीं करते हो माँ मुझे इतने अच्छे से देखती थी मुझे तुम्हारी जरुरत नहीं है ” कहकर रोते हुए चला गया | (Garib Baap Bana Joker Hindi Kahani)

वो देखकर एक लेडी डॉक्टर – “प्रमेश बिना माँ के बच्चे जादा तर घबराहट के सिकार बन जाते है हमें उनकी अच्छे से देखभाल करनी होती है ऐसे चिल्ला कर गुस्सा करोगे तो वो और भी डर जायेगा ये गलत है ” | प्रमेश- ” क्या करना है डॉक्टर काम की तनाव से उनके ऊपर ऐसे चिल्लाया उनका हालत देखकर मुझे बहुत दुःख लग रहा है | क्या करना चाहिए कुछ समझ में ही नहीं आ रहा है ”

एक दिन जब सारे बच्चे खेल रहे थे तो एक जोकर साइकिल के ऊपर उधर आया उनको देखकर सारे बच्चे -” ये जोकर ये जोकर ” कहकर खुसी से चिलाये उधर भी बाबू उठ कर दिलचस्पी से देखने लगा | जोकर- ” हेल्लो बच्चे कैसे है आप मैं सर्कस में से भाग कर आया हु ये बात किसी से भी नहीं बताना मुझे बहुत सारे चाल आते है मैं सब तुम्हे सिखाऊंगा मेरे बारे में सर्कस वालों को मत बताना ठीक है ”

(Garib Baap Bana Joker Hindi Kahani)

बाबु – ” तुम सर्कस से क्यों भागे” जोकर – ” उधर मुझे आज़ादी नही कभी मुझे बहार जाने ही नही देते है अंदर ही रहने के लिए कहते है मैं कोई जेल का हु क्या इसलिए मैं उधर से भाग गया और मुझे बच्चे बहुत पसंद है ” बाबु – ” बहुत आछा किया मुझे साइकिल पर बैठकर घुमाओगे क्या ” जोकर – ” इसीलिए तो मैं यहाँ पर आया हु फ्रेंड्स एक-एक को नहीं सबको एक ही बार साइकिल पर बैठाकर घुमाता हु |

इस तरह जोकर बच्चो को साइकिल पर बैठाकर घुमाने लगा सारे बच्चे बहुत खुस हो गए थे | उसके बाद उसने तार पर चल कर भी दिखाया और बॉल के साथ खेला | टोपी से कबूतर को निकालकर छोड़ा | ये सब देखकर बच्चे मजे से तालियाँ बजा रहे थे | इस तरह जोकर हर दिन बच्चो को साइकिल पर घुमाने लगा |

साइकिल पर बाबु को घर से स्कूल और स्कूल से घर छोड़ने लगा | बाबु को कई तरीके के बिस्कुट और चॉकलेट भी देता था इस तरह वे दोनों अच्छे दोस्त बन गए थे | ऐसे ही एक दिन जब जोकर तार पर चल रहा था तब गलती से उसका पैर फिसल गया और जोकर निचे गिर गया तब उसे बहोत बड़ा चोट पंहुचा | सारे बच्चे उसे हस्पताल में ले जा के भर्ती किये |

लेडी डॉक्टर मुह पर लगा हुआ घाव को साफ़ करने के लिए उसके चेहरे को पोछा तो सारे बच्चे उस चेहरे को देखकर जान गए की वो प्रमेश था | पिता को देखकर बाबू बहुत चोंक गया था |

लेडी डॉक्टर – ” ये क्या है प्रमेश तुम और ये जोकर का रूप जानते हो तुम्हारे इस करतूत की वजह से पैर टूट गया है | क्यों पागलो जैसे हरकत किया तुमने” |

प्रमेश – ” मुझे माफ़ कीजिये डॉक्टर मैं और क्या करता अपने बेटे से नहीं कह सकता हु की तुम्हारी माँ मर गयी है और वापस नहीं आएगी वो रोता है तो मुझे सहन नही होता है | पता नहीं क्यों वो मुझे न पसंद करने लगा | मैं तो सिर्फ उसके खुसी चाहता हु | उसे खुस रखने के लिए मैंने इस जोकर का रूप धारण किया है | बिना आदत का काम करके मैंने अपने पैर को तोड़ लिया है” |

बाबू- ” मुझे माफ़ कर दो बाबा माँ चाहिए माँ कहकर मैंने तुझे बहुत सताया है | मैंने कभी नहीं सोचा की आप मेरे लिए इतनी महनत करोगे | स्कूल में मेरे दोस्तों ने मेरे से कहा की तेरी माँ गुजर गयी है और कभी वापस लौट के नही आएगी तभी मैं समझ गया था की माँ नहीं आएगी | सॉरी बाबा मैं फिर तुम्हे कभी तंग नहीं करूँगा |

कहकर उनका पिता को बाबू ने गले लगाया | ये देखकर सब खुसी से तालियाँ बजाये |

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Consclusion

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